Saturday, October 05, 2019

हिंदी की मानक गिनती - आदित्य सिनाय भांगी

हिंदी की मानक गिनती
एक से सौ तक संख्यावाचक शब्दों का मानक रूप - आदित्य दयानंद सिनाय भांगी
(स्रोत - केंद्रीय हिंदी निदेशालय)


एक से सौ तक संख्यावाचक शब्दों का मानक रूप –

संख्या
संख्यावाचक शब्दों का मानक रूप
1
एक
2
दो
3
तीन
4
चार
5
पाँच
6
छह (छः गलत)
7
सात
8
आठ
9
नौ
10
दस
11
ग्यारह
12
बारह
13
तेरह
14
चौदह
15
पंद्रह
16
सोलह
17
सत्रह
18
अठारह
19
उन्नीस
20
बीस
21
इक्कीस
22
बाईस
23
तेईस
24
चौबीस
25
पच्चीस
26
छब्बीस
27
सत्ताईस
28
अट्ठाईस
29
उनतीस
30
तीस
31
इकतीस
32
बत्तीस
33
तैंतीस
34
चौंतीस
35
पैंतीस
36
छत्तीस
37
सैंतीस
38
अड़तीस
39
उनतालीस
40
चालीस
41
इकतालीस
42
बयालीस
43
तैंतालीस
44
चवालीस
45
पैंतालीस
46
छियालीस
47
सैंतालीस
48
अड़तालीस
49
उनचास
50
पचास
51
इक्यावन
52
बावन
53
तिरपन
54
चौवन
55
पचपन
56
छप्पन
57
सतावन
58
अठावन
59
उनसठ
60
साठ
61
इकसठ
62
बासठ
63
तिरसठ
64
चौंसठ
65
पैंसठ
66
छियासठ
67
सड़सठ
68
अड़सठ
69
उनहत्तर
70
सत्तर
71
इकहत्तर
72
बहत्तर
73
तिहत्तर
74
चौहत्तर
75
पचहत्तर 
76
छिहत्तर
77
सतहत्तर
78
अठहत्तर
79
उनासी
80
अस्सी
81
इक्यासी
82
बयासी
83
तिरासी
84
चौरासी
85
पचासी
86
छियासी
87
सतासी
88
अठासी
89
नवासी
90
नब्बे
91
इक्यानवे
92
बानवे
93
तिरानवे
94
चौरानवे
95
पचानवे
96
छियानवे
97
सतानवे
98
अठानवे
99
निन्यानवे
100
सौ





क्रमसूचक संख्याएँ (Ordinal Numbers)
पहला, दूसरा, तीसरा, चौथा, पाँचवाँ, छठा, सातवाँ, आठवाँ, नौवाँ, दसवाँ
(प्रथम, द्वितीय, तृतीय, चतुर्थ, पंचम, षष्ठ (षष्ठम नहीं), सप्तम, अष्टम, नवम, दशम)

भिन्नसूचक संख्याएँ (Fractional Numbers)
एक चौथाई, आधा, पौन, सवा (सवा एक नहीं), डेढ़ (साढ़े एक नहीं), पौने दो, सवा दो, ढाई (साढ़े दो नहीं), पौने तीन, सवा तीन, साढ़े तीन आदि।


'श्रृंगार' शब्द क्यों ग़लत इस पर सटीक स्पष्टीकरण

'श्रृंगार' शब्द क्यों ग़लत इस पर सटीक स्पष्टीकरण - आदित्य दयानंद सिनाय भांगी, हिंदी वर्तनी विशेषज्ञ, गोवा।









Sunday, October 16, 2016

'महत्त्व' या 'महत्व', कौन-सा शब्द सही है?
जानिए इसका रहस्य!




Sunday, October 09, 2016

जानिए शब्द 'शृंगार' का रहस्य.... 
हिंदी में 'शृंगार' कैसे लिखें?
क्या है इसकी सही वर्तनी? 


















संदर्भ - http://hariraama.blogspot.in/2007/10/secrets-of-devanaagarii-sh.html?m=0

Thursday, September 01, 2016

मानसकन्या - अनुवाद - आदित्य भांगी


मानसकन्या 



मूल कवि – डॉ॰ हनुमंत चंद्रकांत चोपडेकर

अनुवाद – आदित्य दयानंद सिनाय भांगी

मानसकन्या – एक चीट मोगाळ आईक (कोंकणी कविता संग्रह)



तुम पर अतिचार हुए
उस काले दिन की
ख़ौफ़नाक क्षण की याद आते ही
मेरी रूह
दहल उठती है
और पसीना छूटता है
क्रोध से दहकते
मेरे कंपित जीव की देह से

किस किस तरह से
तुमने बरदाश्त किए
उन
महायातनाओं के
निरंतर
कुत्सित अत्याचारों को?
राजधानी में घटे
उस
वारदात के दिन से
मुझे हर पल
एक प्रश्न सालता है
परस्त्री को माँ मानने वाले
हमारे महापुरुष
इस आर्यावर्त में जन्मे थे
यदि ऐसा कहा,
तो कौन विश्वास करेगा?

वैसे भी अब
मुझे
इस जगत् के प्रति अविश्वास हो गया है
वह
विश्वास ही विक्षिप्त हो गया है
नपुंसक हो गया है
अपने सब
रिश्तेदारों और
सगे-संबंधियों के साथ

तुम पर अत्याचार करने वाले
हाथ
मेरे जैसे ही
पुरुष के थे
यह सत्य विदित होते ही
मैं ख़ुद
स्वयं को नरकगामी मानता हूँ
छह नरकासुरों की
अँतड़ियाँ बाहर निकालकर
टाँग दिया चौराहे पर
मैं बाहर निकलता हूँ
निकालने
पुरुषत्व का
जनाज़ा

मुझे पता है
यहाँ
इनसान व्याधियों से मरते हैं
तो कुछ रास्ते पर ही ख़त्म हो जाते हैं
गाड़ी के नीचे आए
क्षण भर में रोटी की तरह
बेले जाते हैं
ये जीव सिर्फ़ एक बार में मरते हैं
एक बार में ही ख़त्म होते हैं
पर तुमने,
इतनी छोटी उम्र में
एकाएक
सहस्र मृत्यु
कैसे सहन किए...
हाँ कैसे????

अब तक
नहीं हुई उतनी
क्रांति
जाग्रत हुई है
एक ही वार में किया उसने
विनाश कानून का
सुरक्षा का
प्रशासन का
राजनीति का
तथा अन्याय का भी

पर,
मेरे देश की बेटी!
मृत्यु से जूझकर
चिर निद्रा में सो गई
पर हम सबको
सतर्क कर गई तू


अचानक!