Saturday, October 05, 2019

'श्रृंगार' शब्द क्यों ग़लत इस पर सटीक स्पष्टीकरण

'श्रृंगार' शब्द क्यों ग़लत इस पर सटीक स्पष्टीकरण - आदित्य दयानंद सिनाय भांगी, हिंदी वर्तनी विशेषज्ञ, गोवा।









Sunday, October 16, 2016

'महत्त्व' या 'महत्व', कौन-सा शब्द सही है?
जानिए इसका रहस्य!




Sunday, October 09, 2016

जानिए शब्द 'शृंगार' का रहस्य.... 
हिंदी में 'शृंगार' कैसे लिखें?
क्या है इसकी सही वर्तनी? 


















संदर्भ - http://hariraama.blogspot.in/2007/10/secrets-of-devanaagarii-sh.html?m=0

Thursday, September 01, 2016

मानसकन्या - अनुवाद - आदित्य भांगी


मानसकन्या 



मूल कवि – डॉ॰ हनुमंत चंद्रकांत चोपडेकर

अनुवाद – आदित्य दयानंद सिनाय भांगी

मानसकन्या – एक चीट मोगाळ आईक (कोंकणी कविता संग्रह)



तुम पर अतिचार हुए
उस काले दिन की
ख़ौफ़नाक क्षण की याद आते ही
मेरी रूह
दहल उठती है
और पसीना छूटता है
क्रोध से दहकते
मेरे कंपित जीव की देह से

किस किस तरह से
तुमने बरदाश्त किए
उन
महायातनाओं के
निरंतर
कुत्सित अत्याचारों को?
राजधानी में घटे
उस
वारदात के दिन से
मुझे हर पल
एक प्रश्न सालता है
परस्त्री को माँ मानने वाले
हमारे महापुरुष
इस आर्यावर्त में जन्मे थे
यदि ऐसा कहा,
तो कौन विश्वास करेगा?

वैसे भी अब
मुझे
इस जगत् के प्रति अविश्वास हो गया है
वह
विश्वास ही विक्षिप्त हो गया है
नपुंसक हो गया है
अपने सब
रिश्तेदारों और
सगे-संबंधियों के साथ

तुम पर अत्याचार करने वाले
हाथ
मेरे जैसे ही
पुरुष के थे
यह सत्य विदित होते ही
मैं ख़ुद
स्वयं को नरकगामी मानता हूँ
छह नरकासुरों की
अँतड़ियाँ बाहर निकालकर
टाँग दिया चौराहे पर
मैं बाहर निकलता हूँ
निकालने
पुरुषत्व का
जनाज़ा

मुझे पता है
यहाँ
इनसान व्याधियों से मरते हैं
तो कुछ रास्ते पर ही ख़त्म हो जाते हैं
गाड़ी के नीचे आए
क्षण भर में रोटी की तरह
बेले जाते हैं
ये जीव सिर्फ़ एक बार में मरते हैं
एक बार में ही ख़त्म होते हैं
पर तुमने,
इतनी छोटी उम्र में
एकाएक
सहस्र मृत्यु
कैसे सहन किए...
हाँ कैसे????

अब तक
नहीं हुई उतनी
क्रांति
जाग्रत हुई है
एक ही वार में किया उसने
विनाश कानून का
सुरक्षा का
प्रशासन का
राजनीति का
तथा अन्याय का भी

पर,
मेरे देश की बेटी!
मृत्यु से जूझकर
चिर निद्रा में सो गई
पर हम सबको
सतर्क कर गई तू


अचानक!

Sunday, May 08, 2016

‘Happy’ के लिए ‘हैपी’ या ‘हैप्पी’? जानिए इसका रहस्य!

‘Happy’ के लिए ‘हैपी’ या ‘हैप्पी’? 

अकसर त्योहारों के दिनों में कई चैनलों पर अँग्रेज़ी शब्द ‘Happy’ को ‘हैप्पी’ लिखा जाता है। ‘Happy Diwali’ को ‘हैप्पी दीवाली’ लिखा जाता है। पर यह गलत है।
सही शब्द है ‘हैपी’।
अँग्रेज़ी में भले ही दो ‘p’ लिखे जाते हैं, पर उच्चारण सिर्फ़ एक ‘p’ जैसा होता है। इसीलिए हिंदी में लिखते समय ‘हैपी’ शब्द सही है।

- मराठी, कोंकणी में इसके लिए ‘हॅपी’ शब्द सही है। 

‘अक्तूबर’ या ‘अक्टूबर’?

‘अक्तूबर’ या ‘अक्टूबर’?

October महीने के लिए सही शब्द कौन-सा? आम तौर पर यह होता है कि जो प्रचलित रूप होता है वही मानकता प्राप्त करता है। आज भले ही समाचार पत्र, टेलिविज़न पर सर्वत्र ‘अक्टूबर’ रूप चल रहा है, पर यह मानक रूप नहीं है।

October महीने के लिए मानक सही रूप ‘अक्तूबर’ है। 

Wednesday, July 15, 2015

‘अंतरराष्ट्रीय’ या ‘अंतर्राष्ट्रीय’? ‘अंतरजातीय’ या ‘अंतर्जातीय’? जानिए रहस्य!

‘अंतरराष्ट्रीय’ या ‘अंतर्राष्ट्रीय’? 
‘अंतरजातीय’ या ‘अंतर्जातीय’?
International के लिए सही शब्द है ‘अंतरराष्ट्रीय’ और Intercaste के लिए सही शब्द है ‘अंतरजातीय’। 
अंतरराष्ट्रीय = अंतर + राष्ट्रीय।  अंतर्राष्ट्रीय = अंतर् + राष्ट्रीय।
अंतरजातीय = अंतर + जातीय। अंतर्जातीय = अंतर् + जातीय।  
अंतर् का अर्थ है भीतर का (Intra)  और अंतर का अर्थ है संबंध (Inter)
तो इस प्रकार इन शब्दों का अर्थ है-
अंतरराष्ट्रीय (International) - दो या दो से अधिक देशों के बीच में होने वाला
अंतर्राष्ट्रीय (Intranational) - किसी देश के अंदर ही अंदर होने वाला
अंतरजातीय (Intercaste) - दो या दो से अधिक जाति के बीच में होने वाला
अंतर्जातीय (Intracaste) - किसी जाति के अंदर ही अंदर होने वाला  

बाबा रामदेव की ‘पतंजलि आयुर्वेद’ वेबसाइट पर और भारत सरकार के ‘International Yoga Day’ के पोस्टर पर 'International' का हिंदी रूप गलत है। वहाँ ‘अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस’ लिखा है, जबकि योग दिवस अंतरराष्ट्रीय स्तर पर है, सिर्फ़ भारत देश में नहीं। इसलिए वहाँ होना चाहिए- ‘अंतरराष्ट्रीय योग दिवस’।